One community. One identity. One digital platform. ✦ Together, we grow.
Patidar Ekta Manch Patidar Ekta ManchPATIDAR EKTA MANCH
Sign in
Community posts

*समाज जागो, वरना इतिहास माफ नहीं करेगा* *एक कड़वा सच और आत्ममंथन का समय* आज समाज की सबसे बड़ी आवश्…

·Community posts

*समाज जागो, वरना इतिहास माफ नहीं करेगा*
*एक कड़वा सच और आत्ममंथन का समय*

आज समाज की सबसे बड़ी आवश्…
*समाज जागो, वरना इतिहास माफ नहीं करेगा* *एक कड़वा सच और आत्ममंथन का समय* आज समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता किसी *माला या मंच की नहीं,* बल्कि *ऐसे सशक्त संगठन की है जो टूटते संबंधों* , *बिखरते परिवारों और बिगड़ते संवादों को जोड़ने* का काम करे। हर दिन, हर कोने से आवाज़ें आ रही हैं— कहीं *बालिका पक्ष* परेशान है, कहीं *बालक पक्ष* टूट चुका है, कहीं *एक पक्ष संबंध तोड़ना नहीं चाहता,* तो कहीं दूसरा *समाज और प्रतिष्ठा के डर से झुकने* को तैयार नहीं। कभी जो संबंध समाज के आशीर्वाद से जुड़ते थे, अब वही संबंध *झूठे अहंकार, लालच और दिखावे* *के बोझ तले टूट रहे हैं।* एक समय था जब एक रिश्ता टूटता था तो पूरा गांव उसे जोड़ने के लिए खड़ा हो जाता था। आज हजार में नहीं, *लाखों में रिश्ते टूटने की गिनती बढ़ रही है* — और समाज मूक दर्शक बना बैठा है। *कड़वा सच यह है —* आज समाज के पास “सम्बन्ध जोड़ने” की नहीं, बल्कि *“सम्मान समारोह”* की टीम है। जहाँ मंच पर माला, दुपट्टा, और फोटो से काम चलता है, लेकिन *जमीन पर टूटते रिश्ते, बिखरते घर, रोती माताएँ और डरे पिता किसी की प्राथमिकता नहीं।* क्या यही समाज है जिसका नाम “संस्कार” पर चलता है? क्या यही संगठन हैं जो “एकता” की बात करते हैं? *जब दो परिवार एक छोटे-से मतभेद से टूट रहे हों* , *तब समाज का धर्म है बीच में खड़ा होना,* *न्याय से नहीं — समभाव से सुलह कराना।* लेकिन आज “समाज का धर्म” सिर्फ “सोशल मीडिया पोस्ट” और “फोटो” में बचा है। मंचों पर भाषण गूंजते हैं, लेकिन घरों में सन्नाटा है। माला पहनाने वाले बहुत हैं, *पर आँसू पोंछने वाला कोई नहीं।* *कहाँ ले जाएगी यह करोड़ों की लेन-देन वाली सोच?* आज विवाह सम्बन्ध पवित्र बंधन से ज्यादा आर्थिक सौदे बनते जा रहे हैं। लेन-देन, प्रतिष्ठा, दिखावा — यही कारण हैं कि जब संबंध टूटता है, तो दोनों पक्ष करोड़ों के नुकसान में और समाज अपनी आत्मा के घाटे में पहुँचता है। क्या यह वही समाज है जहाँ एक कन्या को लक्ष्मी कहा जाता था? अब वही कन्या “लेन-देन की रकम” में मापी जा रही है। *अब समय है—* 1. समाज में “संबंध समाधान प्रकोष्ठ” जैसी टीम बने जो हर विवाद में न्याय और समाधान का मार्ग दिखाए। 2. हर संगठन माला और सम्मान से आगे बढ़े — और जमीन पर सेवा व सुलह को प्राथमिकता दे। 3. हर सदस्य समझे कि अगर समाज नहीं संभला तो आने वाले वर्षों में यह टूटन एक महामारी बन जाएगी। *निष्कर्ष :* समाज जागो, वरना इतिहास माफ नहीं करेगा आज जरूरत है *फोटो से ज्यादा फीलिंग की,* *मंच से ज्यादा मैदान की,* और *सम्मान से ज्यादा समाधान की।* क्योंकि जब समाज अपने ही लोगों की पीड़ा से मुँह मोड़ लेता है, तो वह धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खो देता है। 🙏 *अब वक्त है — समाज को फिर से समाज बनाने का।* मंचों पर नहीं, मन में एकता लाने का। माला से नहीं, ममता से समाज जोड़ने का। *पाटीदार एकता मंच / पाटीदार शादी परिवार* *राम पाटीदार* / *8224839854* *पाटीदार शादी परिवार के व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़ने के लिए लिंक का उपयोग करे।* https://chat.whatsapp.com/LCm9sdta2E8GNhXsYupTqT
♥ Sign in to like

Community conversation

1 likes · Latest comments

Be the first to join the conversation.

Sign in to comment ↗
✦PATIDAR EKTA MANCH

Take the next step in our app.

Enjoy reading here. Download the official app to post, comment, apply for jobs, contact members and support the community.

Download on Google Play ↗