श्री उमिया माता संस्थान – ऊंझा, गुजरात
🏛️ श्री उमिया माता संस्थान – ऊंझा (Unjha), गुजरात
श्री उमिया माता संस्थान, जिसे उमिया माता मंदिर ट्रस्ट, ऊंझा के नाम से भी जाना जाता है, कड़वा पाटीदार समुदाय की कुलदेवी—माँ उमिया—के समर्पित एक प्रमुख धार्मिक संस्था है। इसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ समाजिक उत्थान के लिए भी जाना जाता है।
🏰 इतिहास और पौराणिक कथा
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मां उमिया की स्थापना भगवान शंकर ने स्वयं उंझा में की थी। विक्रम संवत 212, यानी ईसा पूर्व 156 में, राजा व्रजपाल सिंहजी ने इस मंदिर का निर्माण करवाया। राजा अवनीपत ने एक बड़ा यज्ञ किया था जिसमें एक लाख पच्चीस हजार नारियल और घी से भरा हुआ एक कुआँ समर्पित किया गया था।
विक्रम संवत 1122/24 में, वेगदा गामी ने मंदिर का निर्माण करवाया था जिसे अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलूग खान ने ध्वस्त कर दिया था। वह मंदिर उसी स्थान पर स्थित था जहाँ वर्तमान में मोल्लोट विंग में शेषशायी विराजमान हैं। माताजी की मूर्ति को मोल्लोट के बड़े मढ़ में सावधानीपूर्वक संरक्षित किया गया है और आज वहां एक 'गोकh' (गुहा/स्थान) स्थित है। यही माताजी के मंदिर की सच्ची नींव है।
यहाँ आश्विन सुद – 8 को ‘पल्ली’ भरी जाती है। और ज्येष्ठ सुद – 2 को पारंपरिक ‘हेल खेलना ना हालोत्रा’, ‘भटवारी’ और ‘शकुन’ मनाए जाते हैं।
वर्तमान मंदिर का निर्माण पाटीदार समाज के प्रत्येक घर के सहयोग से विक्रम संवत 1943 यानी 1887 ईस्वी में हुआ था। इस निर्माण कार्य की शुरुआत श्री रामचंद्र मंसुखलाल ने की थी और उनके बाद श्री राव बहादुर बेचरदास लश्करी ने इसे आगे बढ़ाया। इस प्रयास में गायकवाड़ सरकार और पाटड़ी दरबार ने भी सहयोग दिया। मंदिर की वास्तु पूजा के समय गायकवाड़ के प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिन्होंने माताजी को मूल्यवान वस्त्र अर्पित किए और श्री बेचरदास लश्करी को भी सम्मानित किया।
उसी समय, श्री नगर्दास उगर्दास पटेल मोल्लोट और श्री कुशलदास रसाते ने ₹2000 की भेंट के साथ सोने का शिखर अर्पित किया।
इसके बाद, 1894 ईस्वी में मानसरोवर का निर्माण हुआ। मंदिर निर्माण के लिए श्री बेचरदास लश्करी के नेतृत्व में एक पंच समिति का गठन किया गया था। इस निर्माण के पत्थर का कार्य और मानसरोवर की जानकारी आज भी ट्रस्ट के पास उपलब्ध है।
1931 में यह ट्रस्ट गठित हुआ और वर्ष 1952 में इसे A/943 नंबर के अंतर्गत पंजीकृत किया गया।
📌 धार्मिक महत्व
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माँ उमिया कड़वा-patidar समाज की मुख्य कुलदेवी हैं। उनकी विभिन्न अवतार—सरस्वती, लक्ष्मी, काली—इसी मंदिर में पूजित हैं
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राज्य सरकार ने इसे गुजरात का “A श्रेणी” तीर्थ स्थल घोषित किया है, जहां हर वर्ष लगभग 75 लाख श्रद्धालु आते हैं
🌊 मंदिर परिसर – वास्तु, सरोवर और धर्मशाला
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मनोहर सरोवर: त्रि-मुखी संगमरमर सरोवर, निर्माण 1887–94
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मुख्य मंदिर: 63 फीट ऊंचा और विशाल मंडप सहित
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धर्मशाला: तीन आश्रम—80+ कमरे, पारंपरिक सुविधा सहित
🕉️ समाज सेवा एवं गतिविधियाँ
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मंदिर ट्रस्ट समाजिक दृष्टि से सक्रिय है:
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चिकित्सा शिविर, शैक्षिक सहायता, विधवा व मानसिक रूप से असमर्थों को आर्थिक सहयोग, प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, ट्राइसायकिल आदि
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धजात महोत्सव: 2024 में आयोजित, जिसमें औपचारिक कार्यक्रम, झवेरा यात्रा आदि का आयोजन हुआ, 20 लाख+ भक्तों ने भाग लिया, तथा 11,111 झंडे चढ़ाए गए .
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🕌 भविष्य की योजनाएँ
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मिशन 2030: भारत में 1001 ‘फोटो मंदिर’ (छोटे SHRINES) बनाने की योजना, मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में चलाया जा रहा है—with ₹15 crores फंडिंग
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अहमदाबाद में एक बड़ा ‘उमियाधाम’ भी बनाया जा रहा है: इसमें कन्वेंशन हॉल, हॉस्टल, मेडिकल सुविधाएँ आदि शामिल होंगे
🗺️ यात्रा – कैसे पहुँचें
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निकटतम एयरपोर्ट: अहमदाबाद (~100 किमी)
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रेल: ऊंझा स्टेशन (~2.3 किमी), मेहसाणा भी एक विकल्प है
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बस/सड़क मार्ग: गुजरात स्टेट हाईवे 41, चेन्निटल से अच्छी कनेक्टिविटी .
✅ निष्कर्ष
श्री उमिया माता संस्थान, ऊंझा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह पाटीदार समाज के सामाजिक, धार्मिक और कल्याणपरक कार्यक्रमों का एक प्रमुख स्तंभ भी है।
इतिहास, वास्तु, आधुनिक सुविधाओं और सामाजिक कार्यों की यह परिवर्तनशील प्रतिबद्धता इसे समाज सेवा का प्रती