*कड़वा सच : समाज के आईने में* *यह वही वाद है जहाँ—* 👉 *माँ-बाप अपने बच्चों को संस्कार से ज्यादा स…
*कड़वा सच : समाज के आईने में*
*यह वही वाद है जहाँ—*
👉 *माँ-बाप अपने बच्चों को संस्कार से ज्यादा सुविधा देना सिखा रहे हैं।*
आज की पीढ़ी को मोबाइल, कार, ब्रांडेड कपड़े और विदेशों की पढ़ाई तो मिल रही है,
लेकिन धर्म की बुनियाद, चरित्र की मज़बूती और माँ-बाप की परंपरा का महत्व खोता जा रहा है।
*बच्चों को सुविधाएँ तो मिल रही हैं, पर संस्कार नहीं।*
फलस्वरूप, जब समय आता है, तो वही बच्चे अपनी पहचान भूलकर हर उस संस्कृति में ढल जाते हैं
जो उन्हें तात्कालिक सुख देती है।
👉 *युवा अपने धर्म से ज्यादा मज़ा और माया में डूबे हैं।*
आज का युवा Netflix, PUBG, पार्टी और शॉर्टकट सफलता में उलझा है।
धर्म, इतिहास, शास्त्र और समाज की बात करना उसे “पुराना” और “बेकार” लगता है।
लेकिन सवाल है—
*जो अपने धर्म और अपनी संस्कृति को बोझ समझता है,*
*वह आने वाली पीढ़ी को क्या देगा?*
👉 *समाज चुपचाप देख रहा है कि उसकी संस्कृति पर कुठाराघात हो रहा है।*
मंदिर टूटते हैं, धर्म का अपमान होता है, रीति-रिवाज़ों को पिछड़ापन बताया जाता है,
*लेकिन समाज चुप रहता है।*
*हम आवाज़ उठाने से डरते हैं,*
*क्योंकि हमें अपनी नौकरी, अपना व्यापार और अपनी आरामदायक ज़िंदगी प्यारी है।*
पर याद रखो—
जो समाज अपनी जड़ों की रक्षा नहीं करता,
वह समाज धीरे-धीरे अस्तित्व खो देता है।
निष्कर्ष : अब भी समय है
अगर माँ-बाप सुविधा से पहले संस्कार देंगे,
अगर युवा मज़े से पहले धर्म और समाज को समझेंगे,
और अगर समाज चुप रहने की जगह बोलना सीखेगा,
तो फिर कोई ताक़त *प्रणाम करने वाले हाथों को सलाम करने पर मजबूर नहीं कर पाएगी।*
🔥 *यह कड़वा सच है, लेकिन यही जागरण का पहला कदम है।*
*पाटीदार एकता मंच / पाटीदार शादी परिवार*
*राम पाटीदार* / *8224839854*
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