गुड्डा गुड्डी का खेल
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गुड्डा गुड्डी का खेल
दो से तीन दशक पहले यह कहावत थी कि विवाह गुड्डा गुड्डी का खेल नहीं है क्योंकि परिवार के वरिष्ठ सोच समझकर रिश्ता पक्का करते थे और उसकी शत प्रतिशत गारंटी रहती रिश्ता निभाने की ओर उन्हीं रिश्तों के बच्चो के आज विवाह होने जा रहे है ।
सगाई ,विवाह पहले भी छूटते रहे है उसकी ठोस वजह होती थी और बहुत नाम मात्र संख्या में लेकिन विगत पांच छह
वर्षों से आज तारीख तक जितनी सामाजिक विकृति समाज में आई है उसे देख सोच कर ही डर लगने लगा है कि आगे समाज का क्या होगा ।
समाज के अंदर नए समाज का निर्माण हो रहा है सगाई संबंध में अगर झूठ नहीं बोला जा रहा है तो फिर रिश्तों में दरार कैसे आ रही है बेटा बेटी दोनों में धीरज नहीं है , परिवार शह और मात का खेल खेलने में लगे है अपने अपने बच्चों में सब अच्छाई ओर सामने कमी नजर आ रही है
शर्ते लागू इसी तर्ज पर रिश्ते ढूंढे जा रहे है प्रतिभा की जगह पैकेज , गाड़ी ,बंगला ,चेहरा ,छोटा परिवार ( सास ससुर नहीं) होना देखा जा रहा है और जरा सा इधर उधर होने पर रास्ते अलग वह भी इतने लाख ले कर या दे कर । हमारा जमीर इतना मर गया कि हमारे बच्चों का सौदा कर रहे है घसारा मांगा जा रहा है माना कि कानून से ऊपर कोई नहीं है अगर बच्चे है तो पालन पोषण गुजारा भत्ता देना बनता है अगर मा बेरोजगार है तो।लेकिन हमारे समाज में सभी बच्चे योग्य और लायक है कमाने की क्षमता रखते है परिवारों के पास आज भी बहुत समृद्धता है लेकिन गांव में पैदा होना रहना अपराध नहीं है माना कि कर्म भूमि शहर हो सकता है देश विदेश का कोई स्थान हो सकता है लेकिन जन्म भूमि का ऋण ओर पैतृक गांव सम्पत्ति ही आज हमारी प्रगति का आधार है ।
सगाई विवाह मनपसंद ही होते है या परिवार की सहमति से किया जा रहे है बेटी , बेटे दोनो की पसंद को तरजीह दी जा रही है फिर यह भागकर विवाह करने की बढ़ती संख्या उन माता पिता को जीते जी मारने की कोशिश है जिन्होंने पच्चीस वर्ष पाल पोशकर बड़ा किया लायक बनाया । हम कतई नहीं चाहेंगे कि हमारी बेटी समाज के बेटे या अन्य समाज के बेटे के साथ भागकर विवाह करे ऐसा ही बेटे से भी की वह भी किसी की बेटी को भगाकर नहीं लाए या ले जाए । सगाई विवाह की उम्र को बढ़ने से समझौते करना पड़ते है कम उम्र वाले बेटे को देना चाहते है पर वह क्यों ले ।
आज विवाह होने वाले बच्चों ओर उनके दादा दादी के विवाह के समय में देखेंगे तो एक पीढी का अंतर दिखाई पड़ रहा है जो फर्टिलिटी (उपजाऊ ) क्लिनिकों की संख्या ओर खर्चे में बढ़ोतरी कर रहा है ।
ऐसी ही कई अन्य प्रमुख बाते भाई भाई में अनबन बोलचाल बंद,गांव में गुटबाजी का नुकसान सगाई विवाह में , व्यसन में युवा लड़के (अब लड़कियों की खबर भी ), मोबाइल से दरार , खर्चीला विवाह , बड़ा मृत्यु भोज , भांति भांति का दिखावा ( अगर उठा पठक कर के करते है तो )इन पर चर्चा , ठोस समाधान , निवेदन या कड़ाई से पालन आदि पर परिचर्चा हेतु हम आपके गांव में सबके साथ बैठने के लिए तैयार है आप साथ देवे और गांव की ताकत ही तहसील जिला की ताकत है ।।
👏आपका उमेश मोदी